माँ

          "माँ"
कहने को तो शब्द है,
पर जहां है इसी में है बसा,
गाथा मैं उसकी गाता हूँ,
कहता है जग जिसे माँ|
धन्य हैं हम उससे जन्म पाकर,
पर वो दर्द सारे झेलती,
विश्व भर की खुशियाँ लाकर,
हमारी झोली में उडेलती|
ये केवल फर्ज निभाना नहीं,
है ये उसकी महानता,
संसार कर्जहीन है ,
बसती उसमें उदारता|
परमेश्वर से भी महान वो,
कहता हैं सब जिसे माँ|

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